| sno | item |
|---|---|
| 1 | आवारा हूँ |
| 2 | प्यार हुआ इकरार हुआ |
| 3 | मेरा जूता है जापानी |
| 4 | घर आया मेरा परदेसी |
| 5 | मन डोले मेरा तन डोले |
| 6 | ये रात भीगी-भीगी |
| 7 | बाबुल सुपरीत की राहें |
| 8 | ऐ मेरे दिल कहीं और चल |
| 9 | याद किया दिल ने कहाँ हो तुम |
| 10 | बाबूजी धीरे चलना |
| 11 | ये लो मैं हारी पिया |
| 12 | चोरी-चोरी कोई आए |
| 13 | जीवन के सफर में राही |
| 14 | उड़े जब जब जुल्फें तेरी |
| 15 | मांग के साथ तुम्हारा |
| 16 | दुख भरे दिन बीते रे भैया |
| 17 | ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है |
| 18 | जाने वो कैसे लोग थे |
| 19 | वक्त ने किया क्या हसीं सितम |
| 20 | सुहाना सफर और ये मौसम हसीं |
| 21 | चढ़ गया पापी बिछुआ |
| 22 | तुम सा नहीं देखा |
| 23 | आईये मेहरबां बैठिये जाने-जां |
| 24 | हाल कैसा है जनाब का |
| 25 | एक लड़की भीगी भागी सी |
| 26 | झुकती घटा गाती हवा |
| 27 | रुक जा ओ जाने वाली |
| 28 | मुड़-मुड़ के न देख |
| 29 | दिल तड़प-तड़प के कह रहा |
| 30 | सारा जहाँ हमारा |
30 Popular Bollywood Songs from 1950s | Songs listicle
यह दशक वह समय था जब फिल्म संगीत ने कला और लोकप्रियता के शिखर को छुआ। इस दौर की कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
दिग्गज गायकों का प्रभुत्व: इस दशक में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी पार्श्व गायन के निर्विवाद सम्राट बनकर उभरे। साथ ही आशा भोसले, किशोर कुमार, मुकेश और मन्ना डे ने अपनी एक अलग पहचान बनाई।
संगीतकारों की त्रिमूर्ति: नौशाद, शंकर-जयकिशन और ओ.पी. नैयर जैसे संगीतकारों ने धुनों में विविधता लाई। जहाँ नौशाद ने शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाया, वहीं ओ.पी. नैयर ने अपनी 'टाँगा लय' (Tonga beat) से संगीत को एक नया उत्साह दिया।
महान फिल्मकार और गीतकार: गुरु दत्त, राज कपूर और बिमल रॉय जैसे निर्देशकों ने गीतों को फिल्म की कहानी का अभिन्न हिस्सा बनाया। साहिर लुधियानवी, शैलेन्द्र और मजरूह सुल्तानपुरी जैसे गीतकारों ने शायरी और कविता को फिल्मी गीतों में पिरोया।
विविधता: इस युग में देशभक्ति (नया दौर), रोमांस (श्री 420), और दार्शनिक गीत (प्यासा) एक साथ सुनने को मिलते थे। इसी दशक में रेडियो सीलोन पर 'बिनाका गीतमाला' की शुरुआत हुई, जिसने गीतों की लोकप्रियता को घर-घर पहुँचाया।
दिग्गज गायकों का प्रभुत्व: इस दशक में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी पार्श्व गायन के निर्विवाद सम्राट बनकर उभरे। साथ ही आशा भोसले, किशोर कुमार, मुकेश और मन्ना डे ने अपनी एक अलग पहचान बनाई।
संगीतकारों की त्रिमूर्ति: नौशाद, शंकर-जयकिशन और ओ.पी. नैयर जैसे संगीतकारों ने धुनों में विविधता लाई। जहाँ नौशाद ने शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाया, वहीं ओ.पी. नैयर ने अपनी 'टाँगा लय' (Tonga beat) से संगीत को एक नया उत्साह दिया।
महान फिल्मकार और गीतकार: गुरु दत्त, राज कपूर और बिमल रॉय जैसे निर्देशकों ने गीतों को फिल्म की कहानी का अभिन्न हिस्सा बनाया। साहिर लुधियानवी, शैलेन्द्र और मजरूह सुल्तानपुरी जैसे गीतकारों ने शायरी और कविता को फिल्मी गीतों में पिरोया।
विविधता: इस युग में देशभक्ति (नया दौर), रोमांस (श्री 420), और दार्शनिक गीत (प्यासा) एक साथ सुनने को मिलते थे। इसी दशक में रेडियो सीलोन पर 'बिनाका गीतमाला' की शुरुआत हुई, जिसने गीतों की लोकप्रियता को घर-घर पहुँचाया।
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