| sno | item |
|---|---|
| 1 | प्यार किया तो डरना क्या |
| 2 | अजीब दास्ताँ है ये |
| 3 | तेरी आँखों के सिवा दुनिया में |
| 4 | अभी न जाओ छोड़ कर |
| 5 | एहसान तेरा होगा मुझ पर |
| 6 | ओ मेरे सोना रे सोना रे |
| 7 | लग जा गले कि फिर ये |
| 8 | मेरे सपनों की रानी |
| 9 | रूप तेरा मस्ताना |
| 10 | आज फिर जीने की तमन्ना है |
| 11 | गाता रहे मेरा दिल |
| 12 | कौन है जो सपनों में आया |
| 13 | तुमसा नहीं देखा |
| 14 | परदेसियों से न अखियाँ मिलाना |
| 15 | बहारों फूल बरसाओ |
| 16 | जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा |
| 17 | ये चाँद सा रोशन चेहरा |
| 18 | दीवाना हुआ बादल |
| 19 | इशारा कर दिया मैंने |
| 20 | आ जा सनम मधुर चाँदनी में |
| 21 | क्या हुआ तेरा वादा |
| 22 | मेरे महबूब कयामत होगी |
| 23 | फूलों के रंग से |
| 24 | ईना मीना डीका |
| 25 | दिल विल प्यार व्यार |
| 26 | झूमका गिरा रे बरेली के बाज़ार में |
| 27 | नीले गगन के तले |
| 28 | आहें न भर ठंडी ठंडी |
| 29 | परदेसी परदेसी जाना नहीं |
| 30 | चन्दन सा बदन |
30 Popular Bollywood Songs from 1960s | Songs listicle
यह दशक बॉलीवुड संगीत के लिए 'रोमांटिक और ऑर्केस्ट्रल युग' के रूप में जाना जाता है।
रंगीन सिनेमा का उदय: इस दशक में ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों की जगह रंगीन (Eastmancolor) फिल्मों ने ले ली, जिससे गानों के फिल्मांकन में खूबसूरती और भव्यता बढ़ गई। कश्मीर और ऊटी जैसी लोकेशंस गानों का मुख्य हिस्सा बनीं।
संगीतकारों का स्वर्ण काल: शंकर-जयकिशन, ओ.पी. नैयर, मदन मोहन और एस.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों ने अपनी कला का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। आर.डी. बर्मन (Pancham Da) ने भी इसी दशक में अपनी क्रांतिकारी शैली की शुरुआत की।
गायकों की लोकप्रियता: मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर अपनी लोकप्रियता के चरम पर थे। दशक के अंत तक किशोर कुमार 'आराधना' (1969) के साथ एक बड़े सुपरस्टार बनकर उभरे।
शायरी और धुन का संगम: इस दौर के गीतों में शब्दों (शायरी) और धुनों का अद्भुत संतुलन था, जो आज भी सदाबहार (Evergreen) माने जाते हैं।
रंगीन सिनेमा का उदय: इस दशक में ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों की जगह रंगीन (Eastmancolor) फिल्मों ने ले ली, जिससे गानों के फिल्मांकन में खूबसूरती और भव्यता बढ़ गई। कश्मीर और ऊटी जैसी लोकेशंस गानों का मुख्य हिस्सा बनीं।
संगीतकारों का स्वर्ण काल: शंकर-जयकिशन, ओ.पी. नैयर, मदन मोहन और एस.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों ने अपनी कला का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। आर.डी. बर्मन (Pancham Da) ने भी इसी दशक में अपनी क्रांतिकारी शैली की शुरुआत की।
गायकों की लोकप्रियता: मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर अपनी लोकप्रियता के चरम पर थे। दशक के अंत तक किशोर कुमार 'आराधना' (1969) के साथ एक बड़े सुपरस्टार बनकर उभरे।
शायरी और धुन का संगम: इस दौर के गीतों में शब्दों (शायरी) और धुनों का अद्भुत संतुलन था, जो आज भी सदाबहार (Evergreen) माने जाते हैं।
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