| sno | item |
|---|---|
| 1 | नज़र के सामने |
| 2 | धीरे धीरे से मेरी ज़िंदगी में आना |
| 3 | देखा है पहली बार |
| 4 | मेरा दिल भी कितना पागल है |
| 5 | पहला नशा |
| 6 | घूंघट की आड़ से |
| 7 | जादू तेरी नज़र |
| 8 | तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त |
| 9 | दीदी तेरा देवर दीवाना |
| 10 | तुझे देखा तो ये जाना सनम |
| 11 | चिया छइयां |
| 12 | दिल तो पागल है |
| 13 | परदेसी परदेसी |
| 14 | ओ ओ जाने जाना |
| 15 | छैया छैया |
| 16 | टिप टिप बरसा पानी |
| 17 | कुछ कुछ होता है |
| 18 | ताल से ताल मिला |
| 19 | दिल से रे |
| 20 | संदेशे आते हैं |
| 21 | छम्मा छम्मा |
| 22 | बाहों के दरमियान |
| 23 | एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा |
| 24 | चुरा के दिल मेरा |
| 25 | घर से निकलते ही |
| 26 | नींद चुराई मेरी |
| 27 | तड़प तड़प के इस दिल से |
| 28 | चांद छुपा बादल में |
| 29 | हुस्न है सुहाना |
| 30 | उठी उठी ले जाऊंगा |
30 Popular Bollywood Songs from 1990s | Songs listicle
90 का दशक बॉलीवुड संगीत का 'मेलोडी युग' (Melody Era) माना जाता है। इस दौर ने 'डिस्को' के शोर को पीछे छोड़कर एक बार फिर से रूहानी संगीत और सुरीली धुनों की वापसी कराई।
मेलोडी की वापसी: 80 के दशक के अंत में एक्शन फिल्मों के दबदबे के बाद, 1990 में आई फिल्म 'आशिकी' ने संगीत का रुख बदल दिया। नदीम-श्रवण, जतिन-ललित और आनंद-मिलिंद जैसे संगीतकारों ने मेलोडी और सादगी को वापस लाया।
दिग्गज गायकों का दौर: यह कुमार सानू, उदित नारायण, अलका याग्निक और कविता कृष्णमूर्ति का स्वर्ण युग था। इन आवाजों ने एक पूरी पीढ़ी के रोमांस को परिभाषित किया।
ए.आर. रहमान की क्रांति: 1992 में 'रोजा' के साथ ए.आर. रहमान ने भारतीय संगीत में इलेक्ट्रॉनिक और विश्व-स्तरीय साउंड का समावेश किया, जिसने संगीत निर्माण की तकनीक को हमेशा के लिए बदल दिया।
कैसेट संस्कृति: यह वह समय था जब कैसेट की बिक्री अपने चरम पर थी। 'टी-सीरीज़' जैसी कंपनियों ने संगीत को घर-घर तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
इंडिपॉप (Indipop) का उदय: फ़िल्मी गानों के साथ-साथ अली हयात, लकी अली और फाल्गुनी पाठक जैसे स्वतंत्र कलाकारों के एल्बम भी काफी लोकप्रिय हुए।
मेलोडी की वापसी: 80 के दशक के अंत में एक्शन फिल्मों के दबदबे के बाद, 1990 में आई फिल्म 'आशिकी' ने संगीत का रुख बदल दिया। नदीम-श्रवण, जतिन-ललित और आनंद-मिलिंद जैसे संगीतकारों ने मेलोडी और सादगी को वापस लाया।
दिग्गज गायकों का दौर: यह कुमार सानू, उदित नारायण, अलका याग्निक और कविता कृष्णमूर्ति का स्वर्ण युग था। इन आवाजों ने एक पूरी पीढ़ी के रोमांस को परिभाषित किया।
ए.आर. रहमान की क्रांति: 1992 में 'रोजा' के साथ ए.आर. रहमान ने भारतीय संगीत में इलेक्ट्रॉनिक और विश्व-स्तरीय साउंड का समावेश किया, जिसने संगीत निर्माण की तकनीक को हमेशा के लिए बदल दिया।
कैसेट संस्कृति: यह वह समय था जब कैसेट की बिक्री अपने चरम पर थी। 'टी-सीरीज़' जैसी कंपनियों ने संगीत को घर-घर तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
इंडिपॉप (Indipop) का उदय: फ़िल्मी गानों के साथ-साथ अली हयात, लकी अली और फाल्गुनी पाठक जैसे स्वतंत्र कलाकारों के एल्बम भी काफी लोकप्रिय हुए।
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