| sno | item |
|---|---|
| 1 | सावन के नज़ारे हैं |
| 2 | मैं तो दिल्ली से दुल्हन लाया रे |
| 3 | नाचो नाचो प्यारे मन के मोर |
| 4 | घर आया मेरा परदेसी |
| 5 | दूर हटो ऐ दुनिया वालों |
| 6 | धीरे धीरे आ रे बादल |
| 7 | अँखियाँ मिलाके जिया भरमाके |
| 8 | सावन के बदलो |
| 9 | ओ जानेवाले बलमवा |
| 10 | दिल जलता है तो जलने दे |
| 11 | बुलबुलों मत रो |
| 12 | आवाज़ दे कहाँ है |
| 13 | मेरे बचपन के साथी |
| 14 | जब दिल ही टूट गया |
| 15 | अफ़साना लिख रही हूँ |
| 16 | यहाँ बदला वफ़ा का |
| 17 | हम को तुम्हारा ही आसरा |
| 18 | इस दुनिया में ऐ दिलवालों |
| 19 | रूप की रानी आई |
| 20 | आयेगा आनेवाला |
| 21 | हवा में उड़ता जाये |
| 22 | जिया बेकरार है |
| 23 | बरसात में हमसे मिले तुम |
| 24 | छोड़ गए बलम |
| 25 | मेरे पिया गए रंगून |
| 26 | सुहानी रात ढल चुकी |
| 27 | तू कहे अगर |
| 28 | झूम झूम के नाचो आज |
| 29 | लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रे |
| 30 | मुश्किल है बहुत मुश्किल |
| 31 | तू मेरा चाँद मैं तेरी चाँदनी |
| 32 | मुरली वाले मुरली बजा |
| 33 | साजन की गलियां छोड़ चले |
| 34 | चुप-चुप खड़े हो |
| 35 | रात को जी चमकें तारें |
| 36 | दिल मतवाला लाख संभाला |
| 37 | ऐ दिल-ए-नाकाम अब क्या |
| 38 | परदेसी क्यों भूला |
| 39 | उड़न खटोले पे उड़ जाऊं |
| 40 | जवान है मोहब्बत |
| 41 | क्या हम ने बिगाड़ा है |
| 42 | हम दर्द का अफ़साना |
| 43 | चंदा रे जा रे जा रे |
| 44 | मरने की दुआएं क्यों मांगू |
| 45 | याद आ रही है |
| 46 | धरती को आकाश पुकारे |
| 47 | गाँव आए हम |
| 48 | दुखियारे नैना ढूंढें |
| 49 | जो फूल यहाँ मुरझाया |
| 50 | दीवाली फिर आ गई |
| 51 | लौट गई फिर |
| 52 | मन की बीन बजा |
| 53 | दीया जलाओ जगमग |
| 54 | तोहे पनघट पे |
| 55 | सावन के महीने में |
| 56 | आ जा मेरी बर्बाद मोहब्बत |
| 57 | कगा रे जा रे जा रे |
| 58 | मेरा सलाम ले जा |
| 59 | बदनामी से क्यों डरते हो |
| 60 | ओ चाँद कहाँ था |
60 Popular Bollywood Songs from 1940s | Songs listicle
यह दशक भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे अक्सर 'मेलोडी का स्वर्ण युग' शुरू होने का समय कहा जाता है।
प्रमुख विशेषताएं:
प्लेबैक सिंगिंग का उदय: 1930 के दशक में कलाकार खुद गाते और अभिनय करते थे, लेकिन 40 के दशक में 'प्लेबैक' (पार्श्व गायन) पूरी तरह से स्थापित हो गया।
महान गायकों का आगमन: इसी दशक में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, मुकेश, गीता दत्त और तलत महमूद जैसे दिग्गजों ने अपने करियर की शुरुआत की। 1947 में के.एल. सहगल के निधन के बाद संगीत की बागडोर इन नए गायकों के हाथ में आ गई।
संगीतकारों का प्रभाव: नौशाद अली, सी. रामचंद्र और शंकर-जयकिशन जैसे संगीतकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक धुनों को फिल्मी संगीत के साथ मिलाकर एक नया रूप दिया।
देशभक्ति और विभाजन: स्वतंत्रता संग्राम के कारण 'दूर हटो ऐ दुनिया वालों' जैसे देशभक्ति गीत लोकप्रिय हुए। वहीं, 1947 के विभाजन का असर भी संगीत जगत पर पड़ा, क्योंकि कई कलाकार भारत से पाकिस्तान चले गए।
प्रमुख विशेषताएं:
प्लेबैक सिंगिंग का उदय: 1930 के दशक में कलाकार खुद गाते और अभिनय करते थे, लेकिन 40 के दशक में 'प्लेबैक' (पार्श्व गायन) पूरी तरह से स्थापित हो गया।
महान गायकों का आगमन: इसी दशक में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, मुकेश, गीता दत्त और तलत महमूद जैसे दिग्गजों ने अपने करियर की शुरुआत की। 1947 में के.एल. सहगल के निधन के बाद संगीत की बागडोर इन नए गायकों के हाथ में आ गई।
संगीतकारों का प्रभाव: नौशाद अली, सी. रामचंद्र और शंकर-जयकिशन जैसे संगीतकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक धुनों को फिल्मी संगीत के साथ मिलाकर एक नया रूप दिया।
देशभक्ति और विभाजन: स्वतंत्रता संग्राम के कारण 'दूर हटो ऐ दुनिया वालों' जैसे देशभक्ति गीत लोकप्रिय हुए। वहीं, 1947 के विभाजन का असर भी संगीत जगत पर पड़ा, क्योंकि कई कलाकार भारत से पाकिस्तान चले गए।
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